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Wild Life Photography Workshop

वाइल्ड लाइफ फोटोग्राफी में हैं रोजगार की अपार संभावनाएं: शिवांग मेहता

चौधरी बंसीलाल विश्वविद्यालय में वाइल्ड लाइफ फोटोग्राफी पर दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन

13अगस्त भिवानी, विधार्थियों के लिए वाइल्ड लाइफ फोटोग्राफी एक बेहतर रोमांचक एवं रोचक विषय है जिसमें रोजगार का अपार संभावनाएं हैं ये विचार प्रसिद्ध वन्य जीव फोटोग्राफर शिवांग मेहता ने चौधरी बंसीलाल विश्वविद्यालय में प्राणि विज्ञान, निकॉन एवं वन विभाग हरियाणा के संयुक्त सौजन्य से वन्य जीव फोटोग्राफी पर राष्ट्रीय कार्यशाला को संबोधित करते हुए कहे।
उन्होंने कहा कि यह जितना जोखिम भरा है उससे कहीं अधिक रोचक एवं रोमांचक है। अगर आप करियर में रोमांच चाहते हैं तो वाइल्ड लाइफ फोटोग्राफी आपके लिए बेहतर विकल्प साबित हो सकता है। कहते हैं कि एक फोटो दस हजार शब्दों के बराबर होती है। फोटोग्राफी की कला में विजुअल कमांड के साथ टेक्निकल नॉलेज भी जरूरी है। जिन विद्यार्थियों को प्रकृति से प्यार है वे इस क्षेत्र में आसानी से जा सकते हैं। यह एक ऐसी फील्ड है जिसमें घने जंगल और खूंखार जानवरों को अपने कैमरे में कैद करने व अलग-अलग मूमेंट्स को दुनिया के सामने लाना पड़ता है। इस क्षेत्र में खतरे भी कम नहीं हैं।
सरकार तथा सामाजिक संगठनों द्वारा वन्य जीवों को बचाने के लिए किए जा रहे प्रयासों के कारण यह क्षेत्र रोजगार की दृष्टि से नए रास्ते खोलने वाला साबित हो रहा है।
वन विभाग के चीफ कंजर्वेटर एम एल राजवंशी ने बतौर मुख्यातिथि संबोधित करते हुए कहा कि वन्य जीवों का संरक्षण प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है। उन्होंने कहा कि यदि पृथ्वी को बचाना है तो वन्य जीवों का संरक्षण अनिवार्य है। उन्होंने प्रदेश सरकार द्वारा वन क्षेत्र विकसित करने के प्रयासों एवं योजनाओं पर विचार रखे। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.आर.के मित्तल ने कार्यशाला की अध्यक्षता करते हुए कहा कि हमें प्रकृति से पूर्णतया मित्रता रखनी चाहिए तभी हम पृथ्वी को महा त्रासदियों से बचा सकते हैं। प्राकृतिक संसाधनों का प्रयोग जरूरत के मुताबिक करें। उन्होंने कहा कि फोटोग्राफी एक रोचक विषय है। एक चित्र अपने आप में एक बड़ा अनुसंधान का विषय हो सकता है। उन्होंने कहा कि यह विश्विद्यालय पर्यावरण एवं प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के साथ ही सामाजिक विकास में अपनी पूर्ण सहभागिता कर इस क्षेत्र में विशेष अभियान चलायेगा।
क्षेत्रिय वन अधिकारी राजेश आर्या ने देश में घटते वन क्षेत्र पर चिंता व्यक्त करते हुए इसे मानव जीवन के लिए घातक बताया। उन्होंने कहा कि हमें अधिक से अधिक पेड़ लगाकर वन क्षेत्र विकसित करने में अपना योगदान देना चाहिए। विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ.जितेन्द्र भारद्वाज ने कहा कि हमें अपने आस पास के लोगों को जागरूक कर वन्य जीव संरक्षण में सहभागिता करनी चाहिए। उन्होंने विश्वविद्यालय द्वारा पर्यावरण संरक्षण की दिशा में उठाये जा रहे कदमों की विस्तृत चर्चा की। विश्विद्यालय की प्राणी विज्ञान की विभागाध्यक्ष प्रो.ललिता गुप्ता ने कहा कि इस कार्यशाला का आयोजन विधार्थियों में वाइल्ड लाइफ फोटोग्राफी में जिज्ञासा पैदा करना और वन्य जीवों की बारिकियां सिखाने के उद्देश्य से किया गया है। कार्यशाला की आयोजन सचिव डॉ.आशा पुनियां ने सभी मुख्यातिथियों का धन्यवाद किया।
कार्यशाला का शुभारम्भ सभी अतिथियों द्वारा माँ सरस्वती के सामने द्वीप प्रज्ज्वलित कर किया गया। कार्यशाला में सभी अतिथियों को पौधे भेंटकर सम्मानित किया गया।मंच संचालन डॉ.गुंचा मुंजाल ने किया। इस अवसर पर निकॉन कंपनी की ओर से सहभागियों को कैमरे की बारिकियां एवं उनका सही संचालन कैसे करना पर व्याख्यान दिया गया। इस अवसर पर प्रो.हरिदत्त कौशिक, प्रो.संजीव कुमार, डॉ.अश्वनी, डॉ.कौशल सांघी, डॉ.पार्वती शर्मा,डॉ.मोनिका,डॉ.नीति चावला, जया भारद्वाज, डॉ.अखलाक सहित लगभग 80 प्रतिभागी उपस्थित थे।