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श्रीमद्भागवत गीता में है संपूर्ण जीवन का सार

श्रीमद्भागवत गीता में है संपूर्ण जीवन का सार: शैलजा दीदी

चौधरी बंसी लाल विश्वविद्यालय के सभा कक्ष में जनसंपर्क विभाग सौजन्य से “मनुष्य अपने भाग्य का स्वयं निर्माता है” विषय पर युवा संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

25 सितंबर भिवानी, श्रीमद्भागवत गीता हमें जीवन में लक्ष्य की ओर निरन्तर आगे बढ़ने की ओर प्रेरणा देती है। श्रीमद्भागवत गीता में संपूर्ण जीवन का सार है ये विचार विवेकानन्द केन्द्र कन्याकुमारी से जीवन वृत्ति कार्यकर्ता शैलजा दीदी ने जनसंपर्क विभाग के सौजन्य से आयोजित युवा संवाद कार्यक्रम में बतौर मुख्यवक्ता कर्मचारियों को संबोधित करते हुए कहे। उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत गीता से हमें सकारात्मक ऊर्जा मिलती है जो हमें सच्चाई और धर्म के मार्ग पर चलने के साथ ही मानव कल्याण का संदेश देती है। आत्मा प्रत्येक जीव में विधमान होती है। और भगवान कण कण में विराजमान है। हमें सच्चाई, आत्मविश्वास,जिज्ञासा और दृढ़ ईच्छा शक्ति आगे बढ़ने में उर्जा प्रदान करती है। उन्होंने बताया कि गीता हमें सत्वगुण और रजोगुण को विकसित करने में सहायक है और तमोगुण को नियंत्रित करती है। उन्होनें कहा कि मानव जीवन का मुख्य उद्देश्य त्रिगुणों से उबरना है। हम श्रीमद्भागवत गीता से सत्वगुण को प्राप्त कर सकते हैं। एक शिक्षक यदि सत्वगुण सम्पन्न होगा तो वह अपने ज्ञान प्रदाता शैक्षिक दायित्व का सही निर्वहन कर सकेगा।उन्होंने स्वामी विवेकानंद की शिक्षाओं पर विस्तृत रखते हुए उनकी शिक्षाओं और आदर्शों को जीवन में धारण करने का आह्वान किया। विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ.जितेन्द्र भारद्वाज ने विश्वविद्यालय की ओर से शैलजा दीदी को स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया। कुलसचिव डॉ.जितेन्द्र भारद्वाज की माँ चन्द्रकला देवी ने शैलजा दीदी को शॉल भेंटकर सम्मानित किया। इस कार्यक्रम के समापन अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.आर.के मित्तल ने विश्वविद्यालय की ओर से शैलजा दीदी का हार्दिक स्वागत करते हुए विश्वविद्यालय पधारने पर हार्दिक आभार व्यक्त किया। उन्होंने शैलजा दीदी को विश्वविद्यालय में चरित्र निर्माण एवं विकास पर प्रारंभ किए पाठ्यक्रम की प्रति भेंट की।
इस कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के शैक्षणिक एवं गैर शैक्षणिक कर्मचारियों ने भाग लिया।