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Hindi week program organized on the subject of Guru Nanak Dev's contribution to Hindi literature, courtesy of Hindi Department

गुरू नानक देव की शिक्षायें हमें जीवन को उदात्त और सौहार्द-भाव से जोड़ने की प्रेरणा देती हैं: प्रो.आर के मित्तल चौधरी बंसी लाल विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग के सौजन्य से गुरू नानक देव के हिन्दी साहित्य में योगदान पर आयोजित हिन्दी सप्ताह कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
20 सितंबर भिवानी, गुरू नानक देव ने संपूर्ण विश्व को मानव कल्याण और आपसी प्रेम का पाठ पढ़ाया। उनके द्वारा प्रदान की गई शिक्षायें हमें जीवन को उदात्त और सौहार्द-भाव से जोड़ने की प्रेरणा देती हैं, ये विचार कुलपति प्रो.आर के मित्तल ने हिन्दी विभाग के सौजन्य से गुरू नानक देव के हिन्दी साहित्य में योगदान विषय पर आयोजित हिन्दी सप्ताह कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कहे।
उन्होंने कहा कि गुरू नानक देव की शिक्षायें आज के समय में सार्थक साबित हो रही हैं। उन्होंने मानवता को परमात्मा की उपासना का मार्ग बताया। संत साहित्य के अनुसार गुरू नानक देव ने नारी सम्मान को महत्व दिया।उन्होंने कहा कि जब जब धर्म की हानि होती है तब तब धरा पर महापुरुषों का अवतरण होता है। उन्होंने कहा कि संसाधनों पर सबकी बराबर भागीदारी होनी चाहिए ताकि असमानता को समाप्त किया जा सके।
प्रो.रामसजन पांडेय ने संबोधित करते हुए कहा कि गुरू नानक देव ने विश्व को धार्मिक एवं अध्यात्मिक रूप में मानवता कल्याण की नई राह दिखाई। उनका हिन्दी साहित्य के विकास में महत्वपूर्ण योगदान है। उनकी वाणी और साहित्य ने आमजन मानस को सच्चाई और नेकी की ओर प्रेरित किया। प्रो.मंजीत सिंह ने कहा कि गुरु नानक देव मध्यकालीन भारत के महान अध्यात्मिक गुरु थे। उन्होंने इस तक पहुँचने का मार्ग केवल प्रेम और करूणा बताया। डीन शैक्षणिक मामले प्रो.राधेश्याम ने कहा कि गुरु नानक की शिक्षाओं को हम जीवन में धारण कर मानव कल्याण की दिशा में अपना महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं। कार्यक्रम के संयोजक एवं हिन्दी विभागाध्यक्ष प्रो.बाबूराम ने कहा कि गुरु नानक देव की वाणी एवं साहित्य ने हिन्दी साहित्य पर अमिट छाप छोड़ी। उनकी वाणी में हिन्दी, पंजाबी, मुल्तानी, अरबी, फारसी और खड़ी बोली स्पष्ट झलकती है। कार्यक्रम का शुभारंभ माँ सरस्वती एवं गुरू नानक देव की प्रतिमा पर द्वीप प्रज्ज्वलित कर किया गया। कार्यक्रम में हिन्दी सप्ताह के दौरान आयोजित काव्य पाठ, प्रश्नोत्तरी और भाषण प्रतियोगिता में विजेता विधार्थियों को प्रमाण पत्र देकर मुख्यातिथियों द्वारा सम्मानित किया गया।कार्यक्रम में मंच संचालन डॉ.स्नेहलता द्वारा किया गया। कार्यक्रम में स्मारिका प्रकाशन में योगदान करने वाले कर्मचारियों को भी सम्मानित किया गया। इस अवसर पर राज्य साहित्य अकादमी के पूर्व निदेशक डॉ.विजय दत्त शर्मा, डॉ.सुरेश मलिक, डॉ.विकास गुप्ता,डॉ.सतबीर सिंह, डॉ.कुलदीप, डॉ.उत्पल, डॉ.सोनिया, डॉ.दीपक कुमारी, डॉ.सुशीला, डॉ.महक, डॉ.पुनम, डॉ.समुन्द्र, सहायक कुलसचिव अतुल गोयल सहित सैकड़ों विधार्थी उपस्थित थे।